मज़ा तो आ रहा हे पर लिखते हुए आज बहुत बुरा लग रहा हे । यकीन मानिये में कोई बुद्धिजीवी टाइप का आदमी नहीं हूँ जो राजनीति को गहराई से जानता हो , मगर में भारत (कुछ लोग जिसे विश्व की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी बोलते हुए थकते नहीं) के उन पचास फीसदी लोगों में से हूँ जिन्होने इस बार भी वोट नही दिया । बहुत से लोग इस चीज़ को ग़लत मानेंगे , कहेंगे अब अगले पाँच साल तक तुम्हे शिकायत करने का कोई अधिकार नहीं हे ..... देश तुम जेसे लोगों की वजह से ही इस हाल में हे .... इत्यादि । में कहता हूँ बहुत खूब....आप सभी ने वोट किया, आप कोनसा किसी से शिकायत कर लेंगे । इतरा तो इसे रहे हे जेसे वोट करने के बाद आप की सारी बातें नेता लोग पांचो साल कान खोल के सुनेंगे । लेकिन में जानता हूँ की वोट करना भी ज़रूरी हे , एग्जाम्पल के लिए वोट दीजिये और बिग बाज़ार आपको सारी खरीद पे १० -२० % की छूट देगा.... । नुक्सान हर हाल में मेरा ही हे ।
लेकिन मेरे कुछ सवाल हे, उन सभी से जो वोट दे के आए और उन सब से देश में डेमोक्रेसी के करता धरता हे ।
पेहला सवाल, आप वोट किसी दे के आए पार्टी को या प्रत्याशी को ? अगर पार्टी कहीं बीच में नही थी तो में आप का सम्मान करता हूँ, लेकिन अगर पार्टी के नाम पे वोट दे के आए हे तो ये क्या गारंटी हे की सरकार बनाते हुए वो उन के साथ गद्बंधन नही करेगी जिनके विचार आप से नही मिलते ? एग्जाम्पल, लेफ्ट और कांग्रेस, सपा और भाजपा, तृणमूल और कांग्रेस आदि । तो जब आप के वोट का इस तरेह हर बार मज़ाक मनाया जा रहा हो तो में वोट क्यों डालूँ ? क्या सबसे बड़ी डेमोक्रेसी में वोटिंग से पहले गद्बंधन फ्रीज़ नही होने चाहिए ? क्या ये चार्सो बीसी नहीं हे की पार्टी मुझसे वोट मांगते हुए कुछ कहती हे और सरकार बनाते हुए उसके विपरीत विचारों वाली पार्टी से हाथ मिला लेती हे ?
दूसरा सवाल, क्या आपने कभी वोट देने से पहले किसी भी पार्टी का मेनिफेस्टो जाना हे ? क्या कभी उन पे कोई चर्चा सुनी हे या उस में भाग लिया हे ? क्या मेनिफेस्टो चुनाव से सिर्फ़ एक महीने पहले किसी प्रेस कांफ्रेंस में रिलीज़ कर भूल जाना चाहिए ? जब मुझे ये पता ही नही चलता की कोई पार्टी मुझ से क्या वायदा कर रही हे तो में उसकी अकोउन्ताबिलिटी की क्या गारंटी लूँ , मुझे माफ़ करे मुझ में ये क्षमता नहीं ।
मेरा मानना हे की, हमारी डेमोक्रेसी कुछ नही बस एअक ढकोसला हे । सिर्फ़ चार्सो बीसी का खेल हे जिस में क्रिकेट जेसा रोमांच हे और जिसे क्रिकेट मैच की तरेह देख एन्जॉय किया जाए । यदि आप सेरिअस हे तो कोशिश करे की ये कुछ छोटे छोटे काम हो सकें -
- पार्टी अपनी मेनिफेस्टो जनता के सामने समय पे रखे और उन पे चर्चा करे । यदि कोई पार्टी ये नही करती तो उसको चुनाव न लड़ने दिया जाए ।
- वो पार्टी जिन के मेनिफेस्तोस कहीं मेल नही खाते वो सरकार एकसाथ न बना पाएं । ये सरासर धोकधादी और चार्सो बीसी हे ।
- गढ़बंधन चुनाव से पहले फ्रीज़ हो ।
और ये सब काम मुश्किल नही हे । क्या मीडिया , जुदिसिअरी और इलेक्शन कमीशन ये चार्सो बीसी रोक नही सकते ? रोक सकते हे, लेकिन जब हम सब को ये एहसास ही नही की हमे हर बार बेवकूफ बनाया जा रहा हे तो why would these agencies move the extra mile....they will not.

2 comments:
Finally tumne likh hi dala apne mann ka bhadas aur vote na dalne ki safai :| ... !!!
well this was for the first time that i cud read your writeup without any pause ... your are improving ... but abhi bhi scope hai ... dekha humare critical hone ka natija ... he he he ...
this is good
how ever i do not agree with your logic of not voting (whatever be the outcome)
We all say what happened in Mumbai .. in Nov .. the media and people woke up to say so many things and when it came to vote these very people were sleeping and had gone on an extended leave .. (rest of comments will send you later) ..
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